
संपादक कॉर्बेट बुलेटिन मुस्तज़र फ़ारूक़ीकालाढूंगी।
रहमतों एवं बरकतों के रमजान उल मुबारक का पहला असरा सोमवार को पूरा हुआ। दूसरा असरा मंगलवार को शुरू होगा। रमजान उल मुबारक के दौरान तीन हिस्सों में इबादत की जाती है। पहला असरा 10 दिन का होता है जिसे रहमतों का माना जाता है। इस असरे में अल्लाह पाक अपने बंदों पर विशेष रहम करता है। विशेषकर रोजेदारों पर। रोजा रखकर दिनभर जिक्रे इलाई करने वाले के गुनाह माफ कर दिए जाते है। अल्लाह की रहमत नाजि़ल होती है। दूसरा असरा जहन्नुम से आजादी का मंगलवार से शुरू होगा।

रमजान महीना नेकी पहुंचाने वाला महिना है। इस महीने मोमिन की रोजी में इजाफ़ा (बढ़ोतरी) किया जाता है। जिस शख्स ने किसी रोजेदार को अफ तार कराया उसके गुनाह (पाप) बख्श दिए गए। उसकी गर्दन अतिशे दोजख (नर्क) की आग से आजाद की जाएगी और रोजेदार के रोजे का सवाब कम किए बगैर अफ तार कराने वाले को भी रोजेदार के बराबर का सवाब मिलेगा। सहाबा ए किराम रजि. ने अर्ज किया हैं यह महीना ऐसा है इसका पहला हिस्सा रहमत है दरमियानी (मध्य) मगफि रत है और आखिरी हिस्सा दोजख से आजादी है। माह शैतान कैद कर दिए जाते हैं।
तरावीह क्या है

रमजान माह के दौरान रात को ईशा की नमाज के बाद एक विशेष नमाज पूरे रमजान माह अदा की जाती है। जिस नमाज में इमाम $खड़े होकर नमाज की हर रकात में मौखिक बिना देखे कुरआन मजिद की तिलावत करते है। तरावीह की नमाज में 20 रकाअत होती है। वही कुछ लोग आठ रकअत भी पढ़ते देखे गए हैं। ये जरुरी बात है कि इसमें कुरआन पढ़ा जाता है। तरावीह एक प्रकार का रात का नमाज़ है जिसमें इमाम साहेब नमाज के दौरान पूरा कुरान को रमजान में सुनाते हैं! अल्लाह ने रमजान के महीने में ही कुरान इंसानों पर अवतरित किया था।











