मजदूरों को राहत दो, उनके लिए पीएम केयर फण्ड से तीन माह का राशन, दस हजार रुपये लॉकडाउन भत्ता, निःशुल्क ट्रेनों की व्यवस्था करो
तत्काल प्रभाव से शराब की सभी दुकानें बंद करो
उत्तराखंड के वामपंथी,जनवादी पार्टियों और संगठनों के द्वारा आज लॉकडाउन का पालन करते हुए कोरोना लॉकडाउन से प्रभावित मजदूरों, गरीबों, आम लोगों, आशा आंगनबाड़ी जैसे स्कीम कर्मियों, उपनल कर्मचारियों आदि के पक्ष धरना आयोजित किया गया।
इस अवसर पर भाकपा (माले) राज्य सचिव कामरेड राजा बहुगुणा ने कहा कि,महीने भर से अधिक से कोरोना के प्रभाव से निपटने के लिए देश भर में लॉकडाउन किया गया. इस लॉकडाउन के चलते रोज कमाने वाले लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. अफसोस के साथ कहना पड़ता है कि सरकार की नीतियों में इस तबके के जीवन और रोजगार के लिए जो खतरा लॉकडाउन के चलते उत्पन्न हो गया है,उसकी चिंता केंद्र सरकार की नीतियों और उसके द्वारा उठाए जा रहे कदमों में कहीं नजर नहीं आती.”
उन्होंने कहा कि, “कोरोना महामारी के समय सरकार शराब की दुकानों को खोलना प्राथमिकता मान रही है, इसका परिणाम शराब की दुकानें खुलते ही राष्ट्रीय शर्म के रूप में हमें दिखाई दिया। कोरोना के समय शराब बिक्री के निर्णय के चलते भीड़ ने सारे मानक ध्वस्त कर दिए, जिसने संक्रमण के खतरे को कई गुना बढ़ा दिया है। इसने शराब की दुकानों को खोलने के सरकार के गलत निर्णय को सामने ला दिया। इसलिए सरकार तत्काल प्रभाव से शराब की दुकानें बंद कर शराबबंदी लागू करे।”
धरने के माध्यम से भाकपा(माले) राज्य सचिव राजा बहुगुणा, भाकपा राज्य सचिव
समर भंडारी, माकपा राज्य सचिव राजेंद्र नेगी, उत्तराखंड लोकवाहिनी कार्यकारी अध्यक्ष राजीवलोचन साह, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी केंद्रीय अध्यक्ष पी.सी.तिवारी, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन के अध्यक्ष पी.पी.आर्य, उत्तराखंड महिला मंच की संयोजक कमला पंत, अंबेडकर मिशन के अध्यक्ष जी.आर.टम्टा, उत्तराखंड पीपल्स फोरम के संयोजक जयकृत कंडवाल, एक्टिविस्ट भार्गव चंदोला, जनअधिकार मंच के अध्यक्ष मोहित डिमरी के हस्ताक्षरों से युक्त ज्ञापन प्रधानमंत्री को ईमेल द्वारा भेजकर मांग की गई कि- घर लौटने के इच्छुक सभी प्रवासी मजदूरों और अन्य लोगों को विशेष ट्रेनों के द्वारा निशुल्क उनके गंतव्यों तक पहुंचाया जाये, अपने राज्यों को वापस लौटने के इच्छुक सभी लोगों को उनके गंतव्यों तक पहुंचाया जाये, लॉकडाउन के चलते बड़े पैमाने पर मजदूर और अन्य लोग रोजगार से महरूम हुए हैं. उनके सामने जीवन-यापन का गंभीर संकट खड़ा हो गया है. इसलिए रोजगार से वंचित सभी लोगों को दस हजार रुपया लॉकडाउन भत्ता दिया जाये साथ ही तीन महीने का राशन भी उपलब्ध करवाया जाये, मजदूरों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने में होने वाला खर्च,दस हजार रुपया लॉकडाउन भत्ता और तीन महीने के राशन देने पर होने वाला व्यय पी.एम केयर फंड में जमा धनराशि से किया जाये. आम जन रोजी-रोटी को तरस रहा है,उसका रोजगार छिन गया है,व्यवसाय ठप है. लेकिन इस दिशा में कोई सकारामत्क एवं ठोस पहल करने के बजाय सरकार द्वारा शराब की दुकानें खुलवा दी गयी हैं. यह निंदनीय है. हम यह मांग करते हैं कि शराब की दुकानें खोलने का निर्णय तत्काल वापस लिया जाये. अमनमणि त्रिपाठी मामले में प्रदेश सरकार को निर्देश दिया जाये कि श्री ओमप्रकाश के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया जाये, उत्तराखंड सरकार द्वारा लॉकडाउन अवधि में उपनल के जरिये नियुक्त संविदा कर्मियों को हटा दिया गया. हम यह मांग करते हैं कि हटाये गए कर्मियों की बहाली हो और समस्त संविदा,उपनल और ठेका प्रथा के नियुक्त कार्मिकों का नियमितीकरण किया जाये, स्वास्थ्य विभाग में आशा कार्यकत्रियाँ एक तरह से विभाग की रीढ़ की तरह हैं. कोरोना से लड़ने के मोर्चे पर भी वे आगे हैं. लेकिन वे सरकारी उपेक्षा का शिकार हैं. हमारी यह मांग है कि आशा कार्यकर्ताओं को आवश्यक सुरक्षा किट, स्वास्थ्य बीमा की गारंटी और दस हजार रुपया तात्कालिक खर्च के लिए दिया जाये.आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के लिए भी ऐसी ही व्यवस्था की जाये क्यूंकि वे भी इस मोर्चे पर निरंतर कार्य कर रही हैं.
डॉक्टर व अन्य स्वास्थ्य कर्मियों,पुलिस,प्रशासन के लोगों सहित कोरोना से लड़ने के मोर्चे पर लगे हर व्यक्ति की स्वास्थ्य और सुरक्षा हेतु समुचित प्रबंध किया जाये. यह देखा जा रहा है कि इस गंभीर संकट के समय भी कुछ लोग सांप्रदायिक घृणा फैलाने के अभियान में लगे हुए हैं. इस मामले पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता प्रकट की गयी है. जिम्मेदार पदों पर बैठे हुए लोगों समेत कतिपय व्यक्तियों द्वारा सांप्रदायिक घृणा फैलाने का अभियान निरंतर जारी है. हमारी यह मांग है कि इस प्रवृत्ति पर तत्काल रोक लगाई जाये और ऐसा करने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्यवाही की जाये. कोरोना से निपटने के लिए आवश्यक है
















