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2 अक्टूबर को ही क्यों मनाया जाता है गांधी जयंती और विश्व अहिंसा दिवस……..

CORBET BULLETIN by CORBET BULLETIN
October 1, 2023
in UTTAR PRADESH, BAREILLY
2 अक्टूबर को ही क्यों मनाया जाता है गांधी जयंती और विश्व अहिंसा दिवस……..
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बरेली- (शमशाद उस्मानी) भारत में 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के रूप में मनाया जाता है, भारत में स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस की तरह ही दो अक्टूबर भी राष्ट्रीय पर्व का दर्जा रखता है। इतिहास के पन्नों में यह दिन सुनहरे अक्षरों में लिखा है। आज के दिन भारत की दो महान विभूतियों का जन्म हुआ था। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री का जन्म।भारत में 2 अक्टूबर का दिन ‘राष्ट्रपिता’ महात्मा गांधी को समर्पित है। इस दिन उनकी जयंती मनाई जाती है। उन्हें ‘बापू’ के नाम से भी जाना जाता है, उन्होंने ही देश को अहिंसा के मार्ग पर चलने की शिक्षा दी।

बापू आदर्शवादी, अहिंसावादी और सत्यवादी थे, उन्होंने न केवल भारत के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान दिया बल्कि लोगों के बीच हो रहे जाति भेदभाव के खिलाफ भी आवाज उठाई।महात्मा गांधी का जन्म गुजरात के पोरबंदर में 2 अक्टूबर, 1869 में हुआ था। उन्होंने बॉम्बे यूनिवर्सिटी में कानून की पढ़ाई की और बाद में यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन चले गए।1891 में स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने इंग्लैंड की बार काउंसिल में काम करना शुरू कर दिया। 30 जनवरी को नाथूराम गोडसे ने गांधी जी की गोली मारकर हत्या कर दी गांधी जी की पूर्व बिड़ला हाउस के बगीचे में गोली मारकर हत्या की गई थी। कहा जाता है कि महात्मा गांधी की 8 किलोमीटर लंबी शवयात्रा निकाली गई थी।बापू का जन्म महात्मा गांधी की उपाधि के साथ हुआ था, कुछ लेखकों के अनुसार यह उपाधि उन्हें बंगाली कवि रवीन्द्रनाथ टैगोर ने दी थी।


महात्मा गांधी का जन्मदिन 2 अक्टूबर दुनिया भर में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।प्रसिद्ध लेखक लियो टॉल्स्टॉय और गांधीजी पत्रों के माध्यम से एक-दूसरे से बात करते थे।गांधीजी को एक बार भी नोबेल पुरस्कार नहीं मिला है लेकिन उनका नाम 1937, 1938, 1939, 1947 में इस पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया था।गांधी स्मारक संग्रहालय की स्थापना 1959 में तमिलनाडु के मदुरै शहर में की गई। इस संग्रहालय में खून से सना हुआ एक कपड़ा रखा हुआ है, जिसे नाथूराम गोडसे द्वारा हत्या के समय महात्मा गांधी ने पहना था।

यह दिन भारतीय इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री का जन्म। इस दिन को खास तरीके से मनाया जाता है जब अंग्रेजी हुकूमत ने भारत को चारों ओर से घेर लिया..उस वक्त हजारों क्रांतिकारी आगे आए और अपनी जान की परवाह न करते हुए देश को आजाद कराने में अहम भूमिका निभाई।उन्ही की वजह से आज भारत देश जीता-जागता राष्ट्रपुरुष है।उन्ही क्रांतिकारियों में प्रमुख नाम राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का है। जिन्होने महज एक लाठी के दम पर अंग्रेजी हुकूमत को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया। गांधी जी ने अहिंसा के रास्ते को चुनकर लाखों लोगों को अपने आन्दोलनो से जोड़ा और हमे आजादी दिलाई। बापू अहिंसा के रास्ते पर ही चलने के लिए सबको प्रेरित भी करते थे।

2 अक्टूबर को ही विश्व अहिंसा दिवस क्यों मनाया जाता है

इसके पीछे एक खास और बड़ी वजह ये है की ।मोहनदास कर्मचंद गांधी का जन्म 2 अकटूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था. उन्होंने लंदन से कानून की पढ़ाई की और बैरिस्टर बनकर ही भारत लौटे.. जब वे भारत आए, तो उन्हें भारत की उस वक्त की स्थिति ने झकझौर कर रख दिया.. क्योंकि अंग्रेजी हुकूमत अपने पैर पूरी तरह से भारत में जमा चुकी थी. गांधी जी देश को आजाद कराने के लिए आजादी की जंग में कूद गए. 1906 में महात्मा गाधी ने ट्रासवाल एशियाटिक रजिस्ट्रेशन एक्ट के खिलाफ पहला सत्याग्रह चलाया. इसके बाद गांधी जी ने अहिंसा को ध्यान में रखते भारत छोड़ो, चंपारण आदि कई आन्दोलन चलाए।

जिनकी वजह से अंग्रेजी हुकूमत देश छोड़ने के लिए मजबूर हो गई।हालाकि गांधी जी के साथ कुछ क्रांतिकारी, जैसे भगतसिंह, राजगुरु, सुख देव, चंद्रशेखर आजाद जैसे लोग भी दूसरे रास्ते से शामिल थे. जिन्हे अहिंसा पर भरोसा नहीं था।गांधी जी के अहिंसा के रास्ते पर चलने वाले आन्दोलनों की वजह ब्रिटिस हुकूमत सकते में आ गई थी। साथ ही उन्होने भारत से जाने का फैंसला ले लिया था। इसलिए गांधी जंयती को कई वर्षों से विश्व अहिंसा दिवस के रुप में भी मनाया जाता है।महात्मा गांधी का पूरा नाम मोहन दास करमचंद गांधी था। गांधी जी की मृत्यु 30 जनवरी 1948 को हुई थी। गांधी जी के अफ्रीका और भारत में आजादी के लिए किये गए आंदोलनों और योगदान को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र ने 15 जून 2007 को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया। महात्मा गांधी ने 1930 में दांडी मार्च तो वहीं 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन का नेतृत्व किया।

ऐसे मिला महात्मा और राष्ट्रपिता का दर्जा ।

नोबेल पुरस्कार विजेता कवि रवींद्रनाथ टैगोर ने उनको महात्मा की उपाधि प्रदान की थी उसके बाद उन्हें महात्मा के नाम से जाना जाने लगा। इसके बाद 4 जून 1944 को नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने सिंगापुर रेडियो से अपने एक संदेश में महात्मा गांधी को ‘राष्ट्रपिता’ कहकर संबोधित किया था जिसके बाद उनको इसी नाम से देश भर में संबोधित किया जाने लगा। देश की आजादी में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले इस संत ने अपनी नि:स्वार्थ भावना और हथियार उठाए बिना अंग्रेजों को देश से खदेड़ बाहर किया और ‘महात्मा’ कहलाए।1904 : लाल बहादुर शास्त्री का जन्मदिन. एक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी होने के साथ ही वह अपनी सादगी और जय जवान जय किसान के नारे के साथ जन जन में लोकप्रिय हुए. 1965 के भारत पाक युद्ध के समय उन्होंने साहसिक निर्णय लेकर दुश्मन को मात दी.

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